STORYMIRROR

Asha Pandey 'Taslim'

Abstract

4  

Asha Pandey 'Taslim'

Abstract

कविता

कविता

1 min
355

सच के बोल

पीले पत्तों में

ढूँढ रहा है हराई का पता

पूछ रहा है रेशों से

इस ढाँचे से कभी


कंपकंपाती ठंड गुज़री होगी

हाँ में थोडा़ झुकना

टूट जाना

टहनियों से बिछड़ना

बिखरना पीला पड़ जाना


लिख रहा है खोजी दल

तक रही है एक टक पत्तियाँ

सवाल का सही जवाब

टूट का कारण बनता है

हवाओं ने आकर समझाया


दो चार पल और जी लेते तुम

झूठ के सहारे टहनियों संग

टूटना तो फिर भी था

सच बोलने और टूट जाने में

पीले पत्तियों का

इतिहास लिखा जा रहा है


करवट लो अब

मिट्टी संग फिर से किसी युग में

पनप उठने के लिये

लम्बे विश्राम की तैयारी करो।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract