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Asha Pandey 'Taslim'

Inspirational


4.5  

Asha Pandey 'Taslim'

Inspirational


आरजू

आरजू

1 min 255 1 min 255

मैं नहीं बनना चाहती

पहाड़

जिसके अंदर क्या है

यह जानने की धुन में


बारुदी विस्फोट किया जाये

मुझे बनना है

नदी के किनार पर खडे़

वृक्ष से टूटकर बह रहा पत्ता


बहते-बहते पहुँचना है मुझे

उस मधुमक्खी के पास

जिसके 'पर' पूरी तरह भीगा हो

और वह मौत के कगार पर खडी़ हो


बनना है मुझे उसका सहारा

बिठाना है उस वक्त़ तक उसे

अपने कांधे पर

जब तक उसके 'पर'

उड़ने लायक न हो जाये


बागों में वो जायेगी

चूसेगी अनेकों रस

लायेगी अपने छत्ते तक

बनेगा उससे मधु

मिठास भरे मुँह से


जब बतायेगी वो मेरा योगदान

पा जाऊंगी मैं निर्वाण।


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