STORYMIRROR

Asha Pandey 'Taslim'

Drama

2  

Asha Pandey 'Taslim'

Drama

बीच का फर्क

बीच का फर्क

1 min
2.3K


क्या है फर्क बताना ज़रा ?

तकता है

बांग लगाता है

नाचता गाता है

घिघयाता है

रेरियाता है

हर एक वो काम करता है

लिये कटोरा सामने

ताकि मेरे पर्स का पैसा

उसके कटोरे तक चला जाये

तुम भी तो वही करते हो ?


तरह तरह के बहाने

भिन्न भिन्न तरह के प्रलोभन

किस्म किस्म के चस्के-मस्के

तेल मलवाई की रस्म

सामूहिक लूट का प्लान

गधे को घोडा़ कहकर

चींटी को हाथी बताकर


शरीफ़ को बेवकूफ़ बनाकर

जाहिल को विद्वान ठहराकर

चाह तो वही रखते हो

उसकी जेब का माल मेरी जेब में आये

तुम चालाक और वो

बेवकूफ बन जाये


लेकिन कहना तो ज़रा

बताना तो बीच का फर्क

कटोरे से जेब वालों के बीच का।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Asha Pandey 'Taslim'

Similar hindi poem from Drama