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Devendraa Kumar mishra

Tragedy

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Devendraa Kumar mishra

Tragedy

भाड़ में

भाड़ में

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अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता 

इसलिए भाड़ में जाओ 

फिर उनकी जीभ ललचायी 

उन्होंने मुहं में रखकर चबाया 

और मन ही मन बोले

"चना और गरम होता तो मजा आ जाता 


चना था चब गया 

गरीब था, दब गया 

क्यों साहब, यही है आपका तंत्र 

वे हंसे, बोले" कभी कभी बिना लाभ के यूँ ही

कर देते हैं आदतन हत्या 


अन्यथा हत्या से क्या फायदा 

हम तो सामूहिक नरसंहार में विश्वास रखते हैं 

एक कि हत्या, हत्या 

और सामूहिक हत्याएँ मात्र दंगा 

लूटपाट में स्त्रियां, धन और राजपाठ 

चना कैसे कर सकता है मना 

उसे तो हर हाल में भाड़ में ही जाना है।


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