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Himanshu Sharma

Tragedy

4  

Himanshu Sharma

Tragedy

बेटियाँ बचाओ

बेटियाँ बचाओ

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बलात्कार की घटनाओं ने देखो,

मुझे अब कर दिया है यूँ आगाह !

या घर बैठा कर रखो बेटियों को,

या रात में किया जाएगा शवदाह !


उत्तर, पूर्व, दक्षिण या हो पश्चिम,

स्त्री-जिजीविषा हो रही अब क्षीण !

बचपन में बच जाती है मृत्यु से तो,

लील जाती है उन्हें वो नज़रें स्याह !


माँ-बाप बड़े नाज़ों से उसे पालते हैं,

लोग उसपे ओछे फिकरे उछालते हैं !

न बाहर ही वो सुरक्षित,

न ही अंदर,कहाँ जाकर

मिलेगी बेटी को पनाह ?


बाप हूँ भविष्य को सोच के काँपता हूँ,

समाज का प्रचलन क्या है,

भाँपता हूँ !ये घटना हो

किसी के साथ भी दोस्तों,


अंदर बैठे बाप को दुःख होता अथाह !

ऐसे पशुओं को जीने का अधिकार नहीं,

सज़ा दो, सिर्फ़ करना न प्रतिकार यूँ ही !

रसायनों के प्रयोग से छीन लो पौरुषत्व,

मैं बस देना चाहूँगा, सब को यही सलाह !


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