STORYMIRROR

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy Action Inspirational

3  

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy Action Inspirational

बे मौसम बारिश का नजारा

बे मौसम बारिश का नजारा

1 min
242

बरसते मेघा बूंदें बनकर,

कभी पानी कभी ओले बनकर,

कहीं तालाब कहीं खेत भरते,

कहीं बारिश का मजा लोग लेते,

कहीं बदरा किसान को बेचैन करते,

बे मौसम बारिश का नजारा,

उजड़ी फसल किसान बेसहारा,

जब जब बे मौसम घन घिरते,

नाथ किसान बे मौत मरते,

हो जाती हैं कल घोषणायें,

मुआवजा पाने की योजनाएं,

फिर भी देश में किसान मरते,

आखिर कहां दोगुनी होती आय।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy