Pramila Singh
Tragedy
मौसम के बदलते रंग को देखकर
हैरानी नहीं होती मुझे,
मैंने इन्सानों को रंग बदलते देखा है
खंजर तो बदनाम है युं ही कत्लकरने के लिए
मैंने जुबां की चोट से लोगों को बिलखते देखा है।
ख्वाबों के नग...
शिक्षक का योग...
कुर्बान हो गए
चाँद पाने को ...
क़ैद की मुद्द...
देर बहूत कर द...
तसल्ली है
मैदान में उतर...
खोने का डर कै...
सही समय की कर...
पुरखों नें पेड़ लगाने का सिलसिला शुरू किया था। पुरखों नें पेड़ लगाने का सिलसिला शुरू किया था।
और कितनी बेईमानी करोगे ? और कितनी धोखाधड़ी का धंधा करोगे ? और कितनी बेईमानी करोगे ? और कितनी धोखाधड़ी का धंधा करोगे ?
ज़िन्दगी की ज़द्दोहद और जीने का संघर्ष कैसे मुस्कुराऊँ! ज़िन्दगी की ज़द्दोहद और जीने का संघर्ष कैसे मुस्कुराऊँ!
और अब... अब डर लगता है अपनी ही परछाईं से। और अब... अब डर लगता है अपनी ही परछाईं से।
मेरे पास तुम हो, वाह क्या वहम मैं पाल रहा था। मेरे पास तुम हो, वाह क्या वहम मैं पाल रहा था।
तेरी बनायी दुनिया …बदल गई ना जाने वो दुनिया …कहाँ है। तेरी बनायी दुनिया …बदल गई ना जाने वो दुनिया …कहाँ है।
'धीरे' हाॅर्न बजा रे पगले ! 'देश' हमारा सोया है ..!! 'धीरे' हाॅर्न बजा रे पगले ! 'देश' हमारा सोया है ..!!
यहाँ तो कदम कदम पर हिंसा है यहाँ तो कदम कदम पर हिंसा है
अब आत्मनिर्भर मैं कैसे बनूं असंख्य लबों पर ये सवाल। अब आत्मनिर्भर मैं कैसे बनूं असंख्य लबों पर ये सवाल।
हम औरतें इंसान कहाँ होती हैं एक ज़मीन हैं बस। हम औरतें इंसान कहाँ होती हैं एक ज़मीन हैं बस।
दिल मानने को तैयार नहीं , मैं अकेला हूंँ। चलते चले जाना है, किसी का अब इंतजार नहीं। दिल मानने को तैयार नहीं , मैं अकेला हूंँ। चलते चले जाना है, किसी का अब इंतजार...
है बड़ा दाता जहाँ में पेड़ क्यों तू काटता । है बड़ा दाता जहाँ में पेड़ क्यों तू काटता ।
सो के सीने पे हर दिन, सुला जाती है बेटी एक दिन पिता को, रुला जाती है। सो के सीने पे हर दिन, सुला जाती है बेटी एक दिन पिता को, रुला जाती है।
एक दूसरे को निहारना, बिन बोले बतियाना । एक दूसरे को निहारना, बिन बोले बतियाना ।
बरसात में बरसे नैना समझ न पाए, बादल बरसे या बरसे नैना । बरसात में बरसे नैना समझ न पाए, बादल बरसे या बरसे नैना ।
आधुनिकता की अंधी दौड़ में हो रहे अपंग पहाड़, आधुनिकता की अंधी दौड़ में हो रहे अपंग पहाड़,
देश की मौजूदा आर्थिक दशा के नाते रोजगार के मौके कम देश की मौजूदा आर्थिक दशा के नाते रोजगार के मौके कम
लोकतंत्र में बहुत कठिन करना चोर की पहचान। लोकतंत्र में बहुत कठिन करना चोर की पहचान।
जिंदगी एक शोरूम की तरह हैजहां खरीदते हैं लोग वस्त्र अपने मनोभाव की तरह। जिंदगी एक शोरूम की तरह हैजहां खरीदते हैं लोग वस्त्र अपने मनोभाव की तरह।
हर स्त्री छिपाये रहती है एक नही अनेक राज अपने भीतर। हर स्त्री छिपाये रहती है एक नही अनेक राज अपने भीतर।