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Vidya Sharma

Children

3  

Vidya Sharma

Children

बचपन

बचपन

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 सुना है बचपन एक खजाना,

 ढूंढने उसको लाना है।

 वह न मिला तो सच कहता हूं,

 मुझको बस मर जाना है।

 आग लगा दी बचपन में,

मतलब के अंगारों ने।

जिन शाखों पर झूले थे,

उनको गले लगाना है।

 सुना है बचपन एक खजाना,

 ढूंढ के उसको लाना है ।।

  

 खो गए जाने किस दुनिया में,

 सावन के झूले और गीत।

 चल चलते हैं फिर बचपन में,

 हर दिन त्यौहार मनाना है।

 सुना है बचपन एक खजाना,

 ढूंढ के उसको लाना है ।।

  

 दूरी इतनी अब आ गई दिल में,

 रूठो तो कोई ना मनाता है।

 ले चलो मुझको फिर बचपन में,

 लौट के अब ना आना है।

 सुना है बचपन एक खजाना,

 ढूंढ के उसको लाना है ।।

   



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