STORYMIRROR

Vidya Sharma

Abstract Inspirational

4  

Vidya Sharma

Abstract Inspirational

युद्ध

युद्ध

1 min
286

हो रहा आरंभ युद्ध जीवन और मृत्यु का,

किसको मिलेगी विजय प्रश्न यही सोच रहा।


हार किसी की तय है तय किसी की जीत है,

पर हुआ क्यों आरंभ प्रश्न यही सोच रहा।


मानव मन की तृष्णा का मानवता मोल चुकाती,

रक्त बहे किसी का भी लाल धरा हो जाती है।


बल निर्बलों पर आजमाए जाएंगे,

क्या हम पशु बन जाएंगे प्रश्न यही सोच रहा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract