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Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Fantasy Thriller Children

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Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Fantasy Thriller Children

बचपन

बचपन

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बीत गये बचपन के दिन अब,

झूला करते घर आंगन झूला,

पींग गई अब सावन गया यूं,

कैसे झूलेंगे मिलकर ये झूला।


बहुत ही लुत्फ उठाया करते,

जब मिल के गीत गाया करते,

छोटे-छोटे बच्चे होते थे संग,

घंटों तक पींग झुलाया करते।


जीवन बीत गया अब सारा,

भूल गया वो अपना प्यारा,

वो नहाना, हँसना, खेलना हो,

अब भूल गये सब गंगा धारा।


समय बड़ा बलवान होता है,

बीत जाता तब इंसान रोता है,

पर नहीं लौटकर आने वाले,

नहीं घोड़े बेच जन सोता है।


कर लो समय पर काम सभी,

वरना फिर पछताना ही होगा,

आगे आते सारे कर्म के फल,

जैसा बोता है जन वैसा भोगा।।



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