STORYMIRROR

Sangeeta- A-Sheroes

Drama Tragedy

4  

Sangeeta- A-Sheroes

Drama Tragedy

बालिका

बालिका

1 min
234


गोबर से लीप रही थी घर की ड्योढ़ी वह बालिका

रूखे बालों में अटकाया था कूड़े से मिला रिबन पुराना

नन्हे कोमल बदन पर आधा ढका सा वस्त्र खींच

नीचे का कुछ ढक रही थी वह बालिका।

कौतूहल से भरी आँखें माँ संग कूड़ा बीनती ऐसे

नन्हे सपनों को अपने चुन रही हो जैसे वह बालिका।

साँझ हुई उस फुटपाथ पर जाना है फैला हाथ माँगने भीख

डर लगता है माँ, हाथ लगाता वो मुच्छड़ मालिक

समझा ना पाए वह बालिका।

देखती आते जाते गाड़ियों में सजे कुछ अपने से दिखते लोगों को

कौन जगह से आते यह सब, मुझ को भी जाना वहाँ

किससे पूछे सोच रही वह बालिका।

रात हुई मैली गुदड़ी में छुपी माँ से सट वह सो जाती

सपने में पहन नए वस्त्र, गाड़ी में देख खुद को मुस्करा जाती

सोती आँखों के कोर से बेपरवाह सा एक आँसू

ढलकाती वह बालिका।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama