बादलों भरा आकाश
बादलों भरा आकाश
झलक, तेरी इक पाने को, घुमड़ - घुमड़ आए बादल !
चाहत, तेरी में ,''मन मयूर ''यूँ नाच उठा।
देख तुझे प्रत्यक्ष, न जाने कब बरस जाएं ?बादल !
उम्मीदों की लौ जलाएं ,तप्त दोपहर में ,
चाहतों के गगन में , प्रेम का संदेश सुनाएँ , बादल !
निराश ,मन आकाश , विचारों की बदली संग ,
क्या ?आज भी न होगी बरसात !घुमड़ता रहा बादल !
दूर कहीं , उम्मीद की इक किरण नजर आते ही ,
प्रसन्नता की लहर में, न जाने कब बरस आए ?बादल !
कड़कती रही बिजली, सीने से तुझे लगा ,
झूम- झूमकर खुशियों की बयार में, बरसते रहे बादल !
झूम -झूमकर खूब बरसते, धरा की प्यास बुझाते बादल !
संगम होता धरा से ,आज क्यों ? इतना इठलाये बादल !

