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Laxmi Tyagi

Romance Others

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Laxmi Tyagi

Romance Others

बादलों भरा आकाश

बादलों भरा आकाश

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झलक, तेरी इक पाने को, घुमड़ - घुमड़ आए बादल !


 चाहत, तेरी में ,''मन मयूर ''यूँ नाच उठा। 


देख तुझे प्रत्यक्ष, न जाने कब बरस जाएं ?बादल !


उम्मीदों की लौ जलाएं ,तप्त दोपहर में ,


चाहतों के गगन में , प्रेम का संदेश सुनाएँ , बादल !


निराश ,मन आकाश , विचारों की बदली संग ,


क्या ?आज भी न होगी बरसात !घुमड़ता रहा बादल !


दूर कहीं , उम्मीद की इक किरण नजर आते ही ,


प्रसन्नता की लहर में, न जाने कब बरस आए ?बादल !


कड़कती रही बिजली, सीने से तुझे लगा ,


झूम- झूमकर खुशियों की बयार में, बरसते रहे बादल !


झूम -झूमकर खूब बरसते, धरा की प्यास बुझाते बादल !


संगम होता धरा से ,आज क्यों ? इतना इठलाये बादल !


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