STORYMIRROR

Sonal Bhatia Randhawa

Drama

4  

Sonal Bhatia Randhawa

Drama

औरत से औरत की फ़रियाद ...

औरत से औरत की फ़रियाद ...

1 min
154

अरे कितनी मोटी हो गयी हो तुम 

ओह ये चेहरे पर कितने दाग हो गए 

तुम्हारी स्किन इतनी डल क्यूँ है

ओहो इतनी कम उम्र में बाल पाक गए 


कितनी ज़ोर से हंसती हो तुम

कुछ तो लोगों का लिहाज़ करो 

ये भी कोई तरीक़ा है बैठने का 

लड़की हो लड़की जैसी रहा करो 


ना हाथ में चूड़ी ना गले में हार 

ना बिंदी ना सिंदूर है ना बिछिया 

इतनी हल्की साड़ी क्यूँ है पहनी 

शादी शुदा कहा से लगोगी बिटिया 


कितने साल हो गए हैं शादी को 

मगर आयी नहीं कोई खुश खबरी 

घर कब बसाओगी आख़िर 

क्या परिवार ज़रूरी है या नौकरी 


कैसे बेहूदा कपड़े पहनती है देखो 

लड़के छेड़ेंगे नहीं तो पूजेंगे क्या 

अरे कैसी तेज चलती है ज़ुबान

ससुराल में जा के नाक कटाएगी क्या 


इतना ग़ुस्सा लड़की हो कर 

बिलकुल अच्छा नहीं लगता 

देखो ससुराल में जाकर तो 

बहुत कुछ है सहन करना पड़ता 


हर कदम औरत की औरत पर 

क्यूँ होती हैं ऐसी टिप्पणिया

खुल कर तुम नहीं जी पायी तो 

क्या डालोगी मेरे पाओं में भी बेड़ियाँ 


क्या ये बेहतर ना होगा 

जन्मों से बंधन जो थोपे गए तुम पर 

तोड़ कर तुम भी चल पड़ो 

साथ साथ मेरे, रख हाथ मेरे कांधो पर !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama