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Sangeeta Ashok Kothari

Tragedy

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Sangeeta Ashok Kothari

Tragedy

अश्क़

अश्क़

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कहने वाले तो अश्क़ को खारा पानी कह देते हैं,

पर इसमें कभी ख़ुशी, कभी संवेदनाओं के ग़ुबार होते हैं।


बेजान होकर भी अश्क़ किसी का दिल तोड़ सकते हैं,

तो कभी बहते अश्क़ टूटे दिलों को जोड़ भी सकते हैं।


रंगहीन, कसैले पर दिल के तारों से इनके तार जुड़े हैं,

कोई दिल तोड़ दे तो सबसे पहले अश्क़ ही बहते हैं।


अतीत के गलियारे में घूम आँखों की राह पकड़ते हैं,

अश्क़ भावनाओं की आड़ लेकर बाहर निकल आते हैं।


प्यार, गुस्से के हो या ग़म के गरम गरम गाल पर लुढ़कते हैं,

आँख से गाल तक अश्क़ अपनी श्वेत धार छोड़ देते हैं।


मानवीय संवेदनाओं से लबरेज़ अश्क़ संवेदनाहीन भी होते हैं,

कभी भूख, कभी लाचारी तो कभी अश्क़ प्रताड़ना के भी होते हैं।



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