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Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Tragedy

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Drama Tragedy

असामयिक निधन

असामयिक निधन

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किसी अपने का असामयिक निधन

विचलित कर देता है, हमारा यह मन

फिर फूलों से भी होती है, हमें चुभन

जब किसी अपने का सुनते है, रुदन


हम लोग ओर कर भी क्या सकते है

सिवाय करने के हम शत शत नमन

फिर भी महकता अक्सर वह, चमन

जिसका व्यवहार हो, यहां पर चंदन


बात कर रहा हूं, अपने प्रिय मित्र की

जिनका हुआ है, असामयिक निधन

वह 19 दिसंबर का था, दुःखद क्षण

उस दिन हृदय में हुई थी, बड़ी चुभन


आंखों से बह रही, अविरल अक्षुधारा

हमे छोड़ जो चला गया दोस्त हमारा

उनका व्यवहार था, मधुर बहुत सारा

इस कारण बहुत रो रहा दिल हमारा


उनकी मौत से तो पूरा गांव स्तब्ध है

मित्र आप थे, सबके ही बड़े प्रिय जन

प्रिय मित्र आपका असमायिक गमन

अशांत कर गया, हम सबका ही मन


आपकी वो प्रिय मंद-मंद मुस्कुराहट

हमारे हौंसलों को देती थी, ताकत

आपके जाने से हुई बहुत घबराहट

अब कौन देगा, जिंदादिली की जन्नत


इस जिंदगी का कोई भरोसा नही है

जिंदगी हंसकर जिओ रोकर नही है

जिसने जिंदादिली का लगाया, उपवन

वो मरने के बाद भी याद आता है, जन


जिसने यहां जिंदगी को माना, सौतन

ओर यहां मौत को कहा अपनी, दुल्हन

वह आदमी बन गया, ऐतिहासिक जन

मौत को मारनेवाले को सब करते, वंदन


श्रीहरि उन्हें अपने श्रीचरणों मे स्थान दे

यही प्रार्थना कर रहा है, हम सबका मन

आपके व्यवहार को याद करेगा, चमन

आपको मेरे प्रिय मित्र शत शत नमन


आदमी तो दुनिया छोड़कर चला जाता

याद रहता पीछे से उसका, सत्य सुमन

किसी अपने का असामयिक निधन

विचलित कर देता है, हमारा यह मन।


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