STORYMIRROR

V. Aaradhyaa

Abstract Drama Tragedy

4  

V. Aaradhyaa

Abstract Drama Tragedy

जीवन इसी तत्क्षण

जीवन इसी तत्क्षण

1 min
238

जो जी लिए वो ज़िन्दगी रही 

जो पड़े काटनी, वो है सजा !

मिला है यहां जो भी जीवन,

लिए चलें भरपूर उसका मजा !


 आज अभी बस यही एक पल,

 जो है हमारा सुनहरा क्षण !

 कल की चाह में क्यूं रहें हम,

 जीए जीवन बस इसी तत्क्षण !


ऐसा होगा तो अच्छा होगा,

नहीं चाह धरें इसकी यहां हम !

यह अनमोल जीवन मिला है,

क्यूं व्यर्थ की चिंता पालें हम !


इस पल को बना लें क्यूँ ना अपना,

क्या पता रहें कल या ना रहें हम !

जीवन का क्या पता और ठिकाना,

इस पल में जीवन जीकर गुजरें हम!


पल-पल में जो यह गुजर रहा है ,

बढ़ते जा रहें हैं कदम दर कदम,

कुछ संतति की गति भी ऐसी ही है,

सतत चलने का तो नाम ही है जीवन!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract