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अमित प्रेमशंकर

Drama

3  

अमित प्रेमशंकर

Drama

अपना घर जेल हो गया

अपना घर जेल हो गया

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विधाता का कैसा ये खेल हो गया

अपना ही गाँव घर जेल हो गया।


घर में ही खाना है, घर में नहाना

कैदी सा जीवन, कहीं भी न जाना।


जेलर बना है,ये घातक "कोरोना"

दु:ख तो यही है, इसी का है रोना।


सब कोई पुछे कि, क्या तेरा हाल है

कैसे बताऊं कि जिना मुहाल है।


रह-रह ख्याल एक आता है मन में

कब तक यूं जिंदा, रहेंगे भवन में।


ये ईश्वर का कैसा, ये खेल हो गया

अपना ही गाँव घर जेल हो गया।


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