Dr J P Baghel
Drama
अनजान डगर, अनजान सफ़र,
चलते रहना है जीवन भर।
है मंत्र सृष्टि का चरैवेति,
जीवित चर है निर्जीव अचर।
अनजान सफर, पर चले चलो,
छोड़ो मन का डर चले चलो।
कुछ नया मिलेगा आखिर में,
बस यही मानकर चले चलो।
धन
दोहे सुल्तानी...
पानी है तो पा...
बचाओ, रोग विक...
जलो, जब तक
कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं। कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं।
इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी। इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी।
न नारी अबला होती है और न ही औरत लाचार होती है। न नारी अबला होती है और न ही औरत लाचार होती है।
मेरे हालात का क्या तुझे हैं पता ? आज तू मुझे सच में ये बता...! मेरे हालात का क्या तुझे हैं पता ? आज तू मुझे सच में ये बता...!
दो राहें थी, इक घर को इक सपनों की ओर चली...। दो राहें थी, इक घर को इक सपनों की ओर चली...।
कुछ पाने की उम्मीद लेकर अंधेरे में ही चल देता है वो। कुछ पाने की उम्मीद लेकर अंधेरे में ही चल देता है वो।
जद्दोजहद इस, बात की है खुद से, की मैं खुदा से माँगू, या भगवान से माँगू...! जद्दोजहद इस, बात की है खुद से, की मैं खुदा से माँगू, या भगवान से माँगू...!
पापा तुम्हें कह नहीं पाती, हर शुक्रिया से ज्यादा तुम्हें प्यार करती हूँ। पापा तुम्हें कह नहीं पाती, हर शुक्रिया से ज्यादा तुम्हें प्यार करती हूँ।
किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा। किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा।
हाँ नही बनी मैं कविता के लिए इसलिए कथा लिख जाती हूँ। हाँ नही बनी मैं कविता के लिए इसलिए कथा लिख जाती हूँ।
अगर तुम्हारे मन में आये कभी कोई प्रश्न तो पूछना इस जहां के लोगों से. अगर तुम्हारे मन में आये कभी कोई प्रश्न तो पूछना इस जहां के लोगों से.
इस बार सबको अनदेखा कर उनका हाथ थामना जिनको बस अपनों की तलाश है इस बार सबको अनदेखा कर उनका हाथ थामना जिनको बस अपनों की तलाश है
ख़ुशी तो जी बस इतनी है जब भी सुकून की तलाश में निकलें हैं, किसी ने आज तक धर्म नहीं पूछा मज़ारों में... ख़ुशी तो जी बस इतनी है जब भी सुकून की तलाश में निकलें हैं, किसी ने आज तक धर्म ...
अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर ! अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर !
किसी के आँसू पोछोगे जब, पास मुझे ही पाओगे...! किसी के आँसू पोछोगे जब, पास मुझे ही पाओगे...!
मंजिल नाम अपने इस बार कर चल उठ प्रण कर ना क्षण एक बेकार कर...! मंजिल नाम अपने इस बार कर चल उठ प्रण कर ना क्षण एक बेकार कर...!
मुझ से क्या पूछते हो, पता इश्क़ की उन बस्तियों का, मैं ख़ुद भटका हुआ हूँ, उसकी वीराना गलियों में..... मुझ से क्या पूछते हो, पता इश्क़ की उन बस्तियों का, मैं ख़ुद भटका हुआ हूँ, उसकी...
थी मेरी भी एक दुनिया जिसमें, एक दोस्त से रंगत थी...! थी मेरी भी एक दुनिया जिसमें, एक दोस्त से रंगत थी...!
बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्तेदारियां बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्त...
मेरे मन के युद्ध मुझे तेरी पूजा ना करने देंगे। मेरे मन के युद्ध मुझे तेरी पूजा ना करने देंगे।