Dr J P Baghel
Drama
अनजान डगर, अनजान सफ़र,
चलते रहना है जीवन भर।
है मंत्र सृष्टि का चरैवेति,
जीवित चर है निर्जीव अचर।
अनजान सफर, पर चले चलो,
छोड़ो मन का डर चले चलो।
कुछ नया मिलेगा आखिर में,
बस यही मानकर चले चलो।
धन
दोहे सुल्तानी...
पानी है तो पा...
बचाओ, रोग विक...
जलो, जब तक
उँचे गगन में उड़ान भरते हैं मौसम की तरह बदल जाते हैं। यह तो हर साल होता है पतझड़ के पंछी... उँचे गगन में उड़ान भरते हैं मौसम की तरह बदल जाते हैं। यह तो हर साल होत...
कर रही यथाशक्ति मैं निर्माण अपना, सत्य करना है जो देखा है सपना...! कर रही यथाशक्ति मैं निर्माण अपना, सत्य करना है जो देखा है सपना...!
इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी। इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी।
लंका में अग्निकांड भी मैं था लंका में अग्निकांड भी मैं था
इन्हीं औरतों की नस्लें छीन लाती हैं तुम्हारे लिए इंद्रधनुष के सारे रंग। इन्हीं औरतों की नस्लें छीन लाती हैं तुम्हारे लिए इंद्रधनुष के सारे रंग।
छंदमुक्त कविता...! छंदमुक्त कविता...!
मैं सही हूँ या नहीं, किसी को समझाना नहीं मुझे अपने “मैं” होने का, भरना नहीं ज़ुर्माना मुझे..। मैं सही हूँ या नहीं, किसी को समझाना नहीं मुझे अपने “मैं” होने का, भरना नहीं ...
इस बार सबको अनदेखा कर उनका हाथ थामना जिनको बस अपनों की तलाश है इस बार सबको अनदेखा कर उनका हाथ थामना जिनको बस अपनों की तलाश है
हर बार दर्द सहकर मैंने तो यही सीखा, "मौत तू एक ख़ूबसूरत कविता है जिसे मैं रोज गुनगुनाऊँगी जब तक तू ... हर बार दर्द सहकर मैंने तो यही सीखा, "मौत तू एक ख़ूबसूरत कविता है जिसे मैं रोज ग...
सुना है आजकल ये भीड़ मे हमला करते हैं, टूट पड़ते हैं मासूम अबला पर, या शिकार करते हैं मासूम बच्चिय... सुना है आजकल ये भीड़ मे हमला करते हैं, टूट पड़ते हैं मासूम अबला पर, या शिकार क...
कई स्वर्णिम चतुर्भुज और बनाने, हाँ, अटल तुम फिर से आना...! कई स्वर्णिम चतुर्भुज और बनाने, हाँ, अटल तुम फिर से आना...!
ना जाने क्या है जो मुझे जाने नहीं देता, एक एहसास है जो तुमसे दूर होने नहीं देता। ना जाने क्या है जो मुझे जाने नहीं देता, एक एहसास है जो तुमसे दूर होने नहीं द...
मैं तुझे हार कर मेरी ऐ दोस्त, फिर कहीं दूर, बहुत दूर चला जाऊँगा...! मैं तुझे हार कर मेरी ऐ दोस्त, फिर कहीं दूर, बहुत दूर चला जाऊँगा...!
आत्मा हवस की धधकती चिताओं में सती हो जाती है। आत्मा हवस की धधकती चिताओं में सती हो जाती है।
नासमझ तो नहीं थी पर नसमझ ही बनी रहूँगी। नासमझ तो नहीं थी पर नसमझ ही बनी रहूँगी।
अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर ! अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर !
क्यूँकि वो नाजायज़ था क्यूँकि वो नाजायज़ था
पराजिता निर्यातित होकर भी, पी जाती हूँ आंसुओं को, बांध लेती हूँ इच्छाओं को। पराजिता निर्यातित होकर भी, पी जाती हूँ आंसुओं को, बांध लेती हूँ इच्छाओं को।
खामोशी, कहने को तो महज अल्फ़ाज़ है, लेकिन इसका अर्थ कुछ और है, खुद में इतने सारे अल्फाजों को समेटे ह... खामोशी, कहने को तो महज अल्फ़ाज़ है, लेकिन इसका अर्थ कुछ और है, खुद में इतने सारे...
ऐ मेरे मुल्क़ के अब फिर मिलेगी आज़ादी, ऐ मेरे मुल्क़ न कहना पड़े रोता क्यों है। ऐ मेरे मुल्क़ के अब फिर मिलेगी आज़ादी, ऐ मेरे मुल्क़ न कहना पड़े रोता क्यों है।