STORYMIRROR

कुमार किशन 'बदर

Romance Classics

3  

कुमार किशन 'बदर

Romance Classics

अलाव

अलाव

1 min
249

सर्द की रात में उसकी याद भी

अलाव सी हो जाती है

वो खयालों में आती है

जुनूँ सी पिघल जाती है,

उसकी याद भी 

सर्द में सुकून दे जाती है,


सर्द में भी बादलों का

घिर जाना होता है

ऐसे में वो सर्द में

सर्द हवाओं सी, अलाव 

पिघलती नजर आती है,


ये सर्द बेइन्तेहा बेवफा है

हमेशा देर से आकर

पहले चली जाती है

सर्द की रात में उसकी याद भी

अलाव सी हो जाती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance