STORYMIRROR

कुमार किशन 'बदर

Classics

3  

कुमार किशन 'बदर

Classics

इक़ उम्र

इक़ उम्र

1 min
179

हमसे मांगी न इक़ उम्र कभी

इक़ उम्र के वास्ते उम्र कभी।


जिस रस्ते को जीना मुक़द्दर

था ही नही रस्ता उम्र कभी।


रोग हो जाना चारागर को

चाक भरे दिल के उम्र कभी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics