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राजेश "बनारसी बाबू"

Classics Inspirational

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राजेश "बनारसी बाबू"

Classics Inspirational

मेरे पापा

मेरे पापा

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आप के अश्क को पहचानती हूँ

पापा।

मैं आपके दर्द ए गम को

पहचानती हूँ पापा।


मेरे गम के हिस्से को आप ओढ़

जाते हो पापा।

बिन कहे तुम समझ जाते हो पापा

मेरे हर अरमान में तुम बसते हो

मेरे पापा।


जब मैं गिरती तब तुम हमे उठाते

जब मम्मी हमें डांटती तब तुम हमे

चुप कराते।

बाहर से कितने सख्त और अंदर

से कितने नरम थे मेरे पापा।

मेरे खिलौने में बसते थे मेरे पापा

टिफिन में चॉकलेट रखते थे मेरे

पापा।

हमारे लिए मैं नए कपड़े लाते थे

पापा।


अपने वर्षों एक फटे कपड़े पहने

रह जाते थे पापा।

फटे एक जोड़ी चप्पल साल दो

साल से पहनते थे पापा।

मेरे लिए नए नए जूते लाते थे

पापा

अपने लिए कभी साइकिल नही

खरीदे हो पापा।


मेरे खुशी और दहेज के लिए

अपना घर बेच दिए मेरे पापा

जीवन भर स्वाभिमानी थे पापा

आज मेरी खुशी के लिए अपनी

पगड़ी किसी के पैर में रख दी पापा।


जिंदगी भर गरीबता और दुख सहे

मेरे पापा

तो आज हमे अकेला क्यू छोड़

गए पापा 

तेरी बेटी की ऊंची डॉक्टर बन गई

पापा 

जरा आंँखें खोल के देखो मेरे पापा।


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