STORYMIRROR

कुमार किशन 'बदर

Romance

3  

कुमार किशन 'बदर

Romance

नशा(नज्म)

नशा(नज्म)

1 min
287

हम भी नशे में तुम भी नशे में 

जैसे कि जहां भी नशे में

नज़र मिलाओ नज़र भी नशे में 

लबों से छूती वो मय भी नशे में।


ज़िक्र है उसका रोज़ नामों में

लिखा पढ़ा जा सकता है नशे में

मंजर में सब वाक़्यात नशे में

मेरे गीत गजल सब है नशे में,


आज उससे बात की और नशे में

वो नज़र में नज़र की बड़े नशे में

अश्क बांह पर निकल आये थे

वो रोते हुए गले आ लगा था नशे में।


बड़े गिले-शिकवे भी रहे हैं हममें

पर ऐसा नहीं के हम न हो नशे में,

बहुत से घर बिखरे और टूटे बे-नशे में

हमने जहां को संभाले रखा नशे में।


दिल में कली खिल उठे जो नशे में

ये नहीं की दिल भी मचल उठे नशे में

डूब कर देखा सूर्य भी सांझ संध्या के नशे में

सुबह आंखें लाल थी फ़िर भी था दिलबर नशे में।


हवाएं हैं लहरें भी कभी क्या मेरी सुनती हैं

सुनी है गर कभी तो वो हम रहे है नशे में

लिख रहा था मैंने हवाओं पर पते तेरे

लोगों का ये कहना है के मैं नशे में।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance