STORYMIRROR

ऐसी जब नहीं हूँ मैं

ऐसी जब नहीं हूँ मैं

2 mins
725


हाँ टूट रही हूँ मैं, बिखरना नहीं चाहती इसलिए लड़ रही हूँ मैं,

मौत अगर दोस्त हो मेरी तो जिंदगी को साथी समझ रही हूँ मैं,

इस कदर हार जाऊं ऐसी नहीं हूँ मैं।


टूटना और फिर जुड़ जाना सीखा है मैंने,

इतनी जल्दी पलकें झुकाऊँ ऐसी नहीं हूँ मैं,

दर्द को दवा में तब्दील कर लूं,

जो मोम सी पिघल जाऊँ ऐसी नहीं हूँ मैं।


खुदा की रजा तो रूबरू नहीं मुझसे,

खुद की रजा से जी रही हूँ मैं,

बहुत दर्द तकलीफें हैं जिंदगी मैं,

पर उनसे घबरा कर बैठ जाऊँ ऐसी नहीं हूँ मैं।


दिल ए दास्तां शायद कोई न समझ पाएगा,

अंदर से दुख घुमड़ रहा है,

बादल की बारिश को बस रोके खड़ी हूँ मैं,

दरिया है खाई है पर इनके बीच मैंने अपनी कश्ती बचाई है,

तेरे तोड़ने से मुरझा जाऊं ऐसी नही हूँ मैं।


अरे अब तो रुक जा ए परवत दीगार,

अब तलक सीख लिया है लड़ना मैंने अब क्यों मौत आई है,

छीनना था सो छीन लिया तूने,

अब जो पास है मैं दे दूं यूं ही,

ऐसी नही हूँ मैं,

मेरा प्यार साथ है मेरे जो तुम छीन ले जाओ

ऐसी नहीं हूँ मैं।


चलो मौत जिंदगी हाथों में तेरे है,

जो मेरा दिल मार पाओ ऐसी नहीं हूँ मैं,

तुझसे लड़ने की गुस्ताखी की है,

और कोई सजा हो तो वो भी दे जाओ,

हां टूट रही हूँ मैं जो नीचे गिरा जाओ ऐसी नहीं हूँ मैं।


ठोकरें राहगीर को राहों में बहुत मिली,

जो चलना ही छोड़ दूं एसी नही हूँ मैं,

कोमल हूँ भावुक हूँ पर मन से कमजोर नहीं हूँ मैं,

तूने जो किया सो किया पर तुझे छोड़ जाऊँ ऐसी नहीं हूँ मैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama