Anita Sharma
Drama Tragedy
अंधेरों में छुपी हुई
कहानियां शोर करती हैं।
उधड़ जाती है...
रंगीन चीरों की सीवन।
उँगलियों के इशारों पर,
बोलते हैं भाव सारे।
बेज़ुबान कठपुतलियाँ,
बोलती बहुत हैं।
पुस्तक मेला
उलझन
गुमशुदा
नज़्म-ए-जिंदग...
आकांक्षा
इश्क़ रूहानी
जिम्मेदार
भटकना जरूरी ह...
उंगलियाँ
श्रृंगार तेरी...
मेरे इस पत्थर जैसे दिल में तुम, इश्क की धड़कन धड़का दो। मेरे इस पत्थर जैसे दिल में तुम, इश्क की धड़कन धड़का दो।
खून से, अंगारों से, फूलों से लिखी चिट्ठियाँ, इतिहास की साक्षी, भविष्य की सारथी खून से, अंगारों से, फूलों से लिखी चिट्ठियाँ, इतिहास की साक्षी, भविष्य की सार...
कभी जीत-हार में न साथ छोड़ता, अद्भुत भाव की रखता नींव।। कभी जीत-हार में न साथ छोड़ता, अद्भुत भाव की रखता नींव।।
यदि आप नित कर्म और अभ्यास के हो, धनी यदि आप नित कर्म और अभ्यास के हो, धनी
उस संघर्ष से जो मैं कई समय से कर रही हूं।। उस संघर्ष से जो मैं कई समय से कर रही हूं।।
बारिश बरस रही है, इश्क की प्यास बढ़ी है, मन तुझे तरस रहा है। बारिश बरस रही है, इश्क की प्यास बढ़ी है, मन तुझे तरस रहा है।
अपने दर्द का हिसाब लेने का आंसुओं के कर्ज़ को चुकाने का अपने दर्द का हिसाब लेने का आंसुओं के कर्ज़ को चुकाने का
इसी ग़म में सफ़ेद से पीली होती इसकी पीर हो। इसी ग़म में सफ़ेद से पीली होती इसकी पीर हो।
इंसानियत के लिए जो जीता हरदम, उसको मूर्ख सदा बेवकूफ कहूं।। इंसानियत के लिए जो जीता हरदम, उसको मूर्ख सदा बेवकूफ कहूं।।
उस घर को बनाने में सारी जमा पूंजी और वक्त लगता है उस घर को बनाने में सारी जमा पूंजी और वक्त लगता है
हर रोज़ यही मैं आस लिए तस्वीर तुम्हारी हांथ लिए मैं घंटो बैठी रहती हूँ चुप होती हूँ फिर हर रोज़ यही मैं आस लिए तस्वीर तुम्हारी हांथ लिए मैं घंटो बैठी रहती हूँ चुप होत...
यूं ही न मिल जाता है, सफलता का उपहार यूं ही न मिल जाता है, सफलता का उपहार
बातें कर लेते हैं आंखें पढ़ लेते हैं जब हम आ जाए सामने खामोश रहते हैं बातें कर लेते हैं आंखें पढ़ लेते हैं जब हम आ जाए सामने खामोश रहते हैं
खुद का मेरा कोई किरदार नहीं जैसे चलाते हो, चलता हूं...... खुद का मेरा कोई किरदार नहीं जैसे चलाते हो, चलता हूं......
तुम मेरे दिल की धड़कन हो मैं भी सांस बन जाऊंगी। तुम मेरे दिल की धड़कन हो मैं भी सांस बन जाऊंगी।
झूट जब नज़र को भरमाए, नए ख्वाब कोई कैसे सजाए? यूँ ख़्वाब कोई जो बिखरे….. झूट जब नज़र को भरमाए, नए ख्वाब कोई कैसे सजाए? यूँ ख़्वाब कोई जो बिखरे…..
इश्क की बारिश बरसाती हो तुम, मेरे ख्वाबों के बादल बनकर, इश्क की बारिश बरसाती हो तुम, मेरे ख्वाबों के बादल बनकर,
असंभव लक्ष्य भी संभव बन जाता,भाई। असंभव लक्ष्य भी संभव बन जाता,भाई।
ख्वाबों के अरमान तो दिन - ब -दिन कुचले ही जा रहे हैं। ख्वाबों के अरमान तो दिन - ब -दिन कुचले ही जा रहे हैं।