Anita Sharma
Drama Tragedy
अंधेरों में छुपी हुई
कहानियां शोर करती हैं।
उधड़ जाती है...
रंगीन चीरों की सीवन।
उँगलियों के इशारों पर,
बोलते हैं भाव सारे।
बेज़ुबान कठपुतलियाँ,
बोलती बहुत हैं।
पुस्तक मेला
उलझन
गुमशुदा
नज़्म-ए-जिंदग...
आकांक्षा
इश्क़ रूहानी
जिम्मेदार
भटकना जरूरी ह...
उंगलियाँ
श्रृंगार तेरी...
आतंकवादियों द्वारा हमला किया जा रहा है। जो धर्म के नाम पर मारते और नष्ट करते हैं। आतंकवादियों द्वारा हमला किया जा रहा है। जो धर्म के नाम पर मारते और नष्ट करते...
कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं। कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं।
फिर तुम्हीं कहो इसका भविष्य क्या होता ? फिर तुम्हीं कहो इसका भविष्य क्या होता ?
इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी। इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी।
किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा। किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा।
साथ नहीं छोड़ेगे हम, मरते दम तक साथ निभायेंगे। साथ नहीं छोड़ेगे हम, मरते दम तक साथ निभायेंगे।
सीधा सादा भोला भाला और स्वभाव से निराला रहता हूँ मैं जनम से धनबाद में। सीधा सादा भोला भाला और स्वभाव से निराला रहता हूँ मैं जनम से धनबाद में।
खुद्दारी के दामन में उनका ही दम घुटता है। जो चापलूसी से सांसो का रिश्ता रखता है। खुद्दारी के दामन में उनका ही दम घुटता है। जो चापलूसी से सांसो का रिश्ता रखता ...
क्यों रिश्तों को समझने सहेजने के बजाय अपना वर्चस्व चाहती है क्यों रिश्तों को समझने सहेजने के बजाय अपना वर्चस्व चाहती है
ना जाने क्या है जो मुझे जाने नहीं देता, एक एहसास है जो तुमसे दूर होने नहीं देता। ना जाने क्या है जो मुझे जाने नहीं देता, एक एहसास है जो तुमसे दूर होने नहीं द...
यातनाएं सही तन और मन पर गहरी पीड़ा सही, यातनाएं सही तन और मन पर गहरी पीड़ा सही,
चाहे कितना घनघोर अँधेरा छाया है कर्मवीरों ने अमावस को पूनम बनाया है। चाहे कितना घनघोर अँधेरा छाया है कर्मवीरों ने अमावस को पूनम बनाया है।
अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर ! अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर !
रोचक शास्त्र मैं वर्तमान की वार्ता कहता हूँ रोचक शास्त्र मैं वर्तमान की वार्ता कहता हूँ
क्यूँकि वो नाजायज़ था क्यूँकि वो नाजायज़ था
वह भोर के तारे से अधिक गोरा, और चन्द्रमा से भी अधिक सफेद है, वह भोर के तारे से अधिक गोरा, और चन्द्रमा से भी अधिक सफेद है,
इस द्रौपदी की गिरधारी तक काहे ना पहुंचे पुकार है, इस द्रौपदी की गिरधारी तक काहे ना पहुंचे पुकार है,
अब जब मैं जब गीले बाल से ही रसोई में घुसती हूँ तुम सी ही लगने लगती हूँ माँ... अब जब मैं जब गीले बाल से ही रसोई में घुसती हूँ तुम सी ही लगने लगती हूँ माँ...
बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्तेदारियां बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्त...