Asha Pandey 'Taslim'
Abstract
वो छत भी है
रस्सी भी
अडा़व की लकडी़ भी
धूप में सूखने को
डाली गईं चादरें भी
टोकरी और दाना भी
बस नहीं है तो
मासूम सा वो बचपना
सब्र की वो चुप्पी
बुद्धू चिड़िया
और चालाक गिलहरी।
जड़
कविता
पालनहार
गुनहगार
मसीहा
झींगुर
फ़न
बिखराव
_टेहलुआ
आरजू
अनदेखा कर,जिसने अजनबी मुझे बनाया था उस ने ही यारो विश्वासघात किया था। अनदेखा कर,जिसने अजनबी मुझे बनाया था उस ने ही यारो विश्वासघात किया था।
आई फागुन रुत चहुँ दिशि छाई तो जौबन ले अँगड़ाई सखि री रुत होली की आई। आई फागुन रुत चहुँ दिशि छाई तो जौबन ले अँगड़ाई सखि री रुत होली की आई।
आया बासंती त्योहार बिखरे रंग हज़ार! आया बासंती त्योहार बिखरे रंग हज़ार!
कैसे चीन्हेंगे अब राधा को, सोच रहे कुंजबिहारी! कैसे चीन्हेंगे अब राधा को, सोच रहे कुंजबिहारी!
हर घर में रोने को एक कमरा होना चाहिए। हर घर में रोने को एक कमरा होना चाहिए।
कहता है आज़ाद सुमन सम खिले खिले । तन मन चढ़ी उमंग कि जब रंग से रंग मिले।। कहता है आज़ाद सुमन सम खिले खिले । तन मन चढ़ी उमंग कि जब रंग से रंग मिले।।
विलास लिए बैंगनी आया भाग्य लिए है नीला विलास लिए बैंगनी आया भाग्य लिए है नीला
अंत में शांत, स्थिर हो स्वयं में समाते छू ही लेते हैं अपने नए आरम्भ को। अंत में शांत, स्थिर हो स्वयं में समाते छू ही लेते हैं अपने नए आरम्भ को।
रंग भरे कलश सखियाँ घोली भींगी चूनर चोली, पकड़ कलाई श्याम ने प्राण प्यारी संग भिगो ली। रंग भरे कलश सखियाँ घोली भींगी चूनर चोली, पकड़ कलाई श्याम ने प्राण प्यारी संग ...
फूल की तरह मैं खुशबू फैलाऊँ, मैं सदा जरूरत पर किसी के काम आऊँ, फूल की तरह मैं खुशबू फैलाऊँ, मैं सदा जरूरत पर किसी के काम आऊँ,
दाता है हम सबका मालिक, नमन उसे शत बार है। दाता है हम सबका मालिक, नमन उसे शत बार है।
आँखें खुली तो खुद को बिस्तर पर पाया ये तो हमें स्वप्न था आया ! आँखें खुली तो खुद को बिस्तर पर पाया ये तो हमें स्वप्न था आया !
कहते थे कभी सादगी तेरी.. मन मोह लेती है मेरी..… कहते थे कभी सादगी तेरी.. मन मोह लेती है मेरी..…
तोड़ आज निजता का अभिमान रख उस माँ की ममता का मान। तोड़ आज निजता का अभिमान रख उस माँ की ममता का मान।
मस्ती में झुमे गायेगे सभी "चंग बजाओ कि रंग रंगीली होली आई।। मस्ती में झुमे गायेगे सभी "चंग बजाओ कि रंग रंगीली होली आई।।
जीवंत उन्माद रंगों की बौछार के साथ। होली है! अबाध आनन्द और उल्लास का झरना! जीवंत उन्माद रंगों की बौछार के साथ। होली है! अबाध आनन्द और उल्लास का झरना!
मन की तरंगों को महसूस कर, जीवन का हर रंग समेटना है। मन की तरंगों को महसूस कर, जीवन का हर रंग समेटना है।
किसी की छोली में खुशियों के रंग भरो, खुशियों के तुम रंग भरो। किसी की छोली में खुशियों के रंग भरो, खुशियों के तुम रंग भरो।
मुस्कराहट घूंघट से बाहर निकल रही है जटिलता अपने बोझ से चटख रही है! मुस्कराहट घूंघट से बाहर निकल रही है जटिलता अपने बोझ से चटख रही है!
फुहार बरस रही रंगों की चहुँ दिश मस्तों की टोली ! फुहार बरस रही रंगों की चहुँ दिश मस्तों की टोली !