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Navya Agrawal

Abstract Inspirational

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Navya Agrawal

Abstract Inspirational

विश्वासघात

विश्वासघात

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चाहत को मेरी उसने रुसवा किया था

जिसपर किया सबसे ज्यादा यकीं

उस ने ही यारो विश्वासघात किया था


दोस्त नहीं दोस्त से बढ़कर माना था

जान से बढ़कर भी जिसे चाहा था

भरोसे को मेरे जिसने तार तार किया था

उस ने ही यारो विश्वासघात किया था


सोचा न था कभी ऐसा धोखा मिलेगा

दिल का रिश्ता इतना खोखला निकलेगा

दोस्ती को मेरी,जिसने यूं बदनाम किया था

उस ने ही यारो विश्वासघात किया था


जरूरी हूं कहकर पलको पे बिठाया था

प्यार का अहसास दिलाकर दिल में बसाया था

अनदेखा कर,जिसने अजनबी मुझे बनाया था

उस ने ही यारो विश्वासघात किया था।


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