STORYMIRROR

Arun Pradeep

Abstract

4  

Arun Pradeep

Abstract

होली नवगीत

होली नवगीत

1 min
251

आया बासंती त्योहार

बिखरे रंग हज़ार

ग़ुलाबी हवा में फ़ैला

प्यार ही प्यार

अंगना में रंग लगाते देवर भौजी

उसारे में चैती गायें मिल मनमौजी

भंग ठंडाई छनती देखो बार बार

आया...

गोपी की लाठी बरसे गोपों की ढाल

फगुआ धमार गूंजे ढोलक की ताल

रति पार्वती के मन मारे हिलोरें प्यार

आया...!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract