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Dr Rajmati Pokharna surana

Abstract

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Dr Rajmati Pokharna surana

Abstract

रंग हो गये फीके सारे कैसी हवा ये छाई कैसे बजे अब चंग थाल कैसी होली है आई।

रंग हो गये फीके सारे कैसी हवा ये छाई कैसे बजे अब चंग थाल कैसी होली है आई।

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रंग हो गये फीके सारे कैसी हवा ये छाई

कैसे बजे अब चंग थाल कैसी होली है आई।


उदासी का रंग है छाया गुम हुई सारी उमंग,

मन का हर कोना रंगहीन कैसी मायूसी है छाई।


फागुनी हवाओं से फ़िजाओ का कण-कण महका,

गुलाल,अबीर से दूर हुए हम कैसी होली है आई।


महकेगा चमन एक बार फिर से रंग भी बरसेंगे,

खुशियों के रंगो से सराबोर होगी मेरे चमन की पुरवाई।

चंग भी बजेगा मन मे उमंग उम्मीद के रंग बिखरेगे,

बेरंग नहीं तब होली रंगों की मधुर धुन पर बजेगी शहनाई।


सबके चेहरों पर रंग बेशुमार होगे खुबसूरत जहाँन होगा,

मस्ती में झुमे गायेगे सभी "चंग बजाओ कि रंग रंगीली होली आई।।


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