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Nand Kumar

Abstract

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Nand Kumar

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उपहार

उपहार

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नये-नये सुन्दर हम सबको,

मिल जाते उपहार बहुत।

धन्यवाद करते दाता को,

जिसने हमको दिया है कुछ।।


इस धरती पर सुन्दर काया,

देकर के है जन्म दिया।

भोग के साधन सकल बनाए,

सपनो को साकार किया।।


मात पिता सब अपनो का,

पाया अनुपम उपहार है।

प्रेम दया परहित की शिक्षा, 

बिन सब जीवन भार है।।


अन्न फूल फल जल वायू,

सब प्रकृती का उपहार है।

दाता है हम सबका मालिक,

नमन उसे शत बार है।


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