STORYMIRROR

Sunil Maheshwari

Abstract

3  

Sunil Maheshwari

Abstract

उम्मीद की डोर

उम्मीद की डोर

1 min
563

यारों मैंने बांधे है ख्वाब अपने 

विश्वास और उम्मीदों की डोर से,

कदम है जमीन पे अभी,

पर नजरें आंसमा के छोर पर।


यारो थोडा धीमा हो गया हूं,

यह बात तो पक्की है,

पर अब रूकूंगा नहीं,

यह भी नक्की है।


हौसलों की स्याही से लिखता हूं,

कहानी में अपनी,

शब्दों की दुनिया में बनानी है,

मिसाल अपनी।


जोश जुनून कम नहीं होगा,

कर्मो का तूफान कम नहीं होगा,

कोशिशें में द़र-बद़र करता रहूंगा,

जब तक है जान लड़ता रहूंगा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract