STORYMIRROR

Arpana (अर्पण)

Abstract

3  

Arpana (अर्पण)

Abstract

सिर्फ कुछ वक्त के लिए

सिर्फ कुछ वक्त के लिए

1 min
376

सिर्फ कुछ वक्त के लिए मैं

शून्य हो जाना चाहती हूँ।


इस प्यारी सी प्रकृति में

विलुप्त हो जाना चाहती हूँ।


बनकर कोई बूंद बारिश की

बादलों से बरसना चाहती हूँ।


बनकर कोई हवा, सैर मैं

प्रकृति की करना चाहती हूँ।


सिर्फ कुछ वक्त के लिए मैं

शून्य हो जाना चाहती हूँ।


बनकर कोई रोशनी सूरज की

सवेरा नया मैं चाहती हूँ।


बनकर चाँदनी चाँद की मैं

रात में उजाला चाहती हूँ


सिर्फ कुछ वक्त के लिए

मैं खो जाना चाहती हूँ


इस प्यारी सी प्रकृति में

विलुप्त हो जाना चाहती हूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract