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Preeti Sharma "ASEEM"

Abstract

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Preeti Sharma "ASEEM"

Abstract

मुझे समझौता ही रहने दो

मुझे समझौता ही रहने दो

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जिंदगी में,

बहुत बड़े-बड़े

खवाब तो नही देखें।

मेरी आँखों में,

छोटे- छोटे गूंगे,

सपने तो रहने दो।

मुझे समझौता ही रहने दो।


जिंदगी से,

मैंने सौदे तो नही कियें।

सच का सामना करने के लिए,

मुखौटे भी नही लिये

मेरा सच,  मेरे साथ रहने दो।

मुझे समझौता ही रहने दो।


जिंदगी से प्यार किया

छल तो नहीं किया।

शब्दों की सलाखों को,

मेरे दिल के आर-पार ही रहने दो।

मुझे समझौता ही रहने दो।


शिकवे और शिकायतों पर,

अब न वक्त जाया कर।

शिकायतें सब मेरी,

मेरे साथ, तो रहने दो।

मुझे समझौता ही रहने दो।


मैं किसी का,

अपना कहाँ हो पाया।

पराया था, 

पराया ही रह गया।

मुझे अपना तो, रहने दो।

मुझे समझौता ही रहने दो।


देख लिया चेहरा दुनिया का,

मकसदों और सियासतों का है।

मेरा चेहरा,

बस मेरा ही रहने दो

मुझे समझौता ही रहने दो

मुझे समझौता ही रहने दो।


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