पर्यावरण रक्षक
पर्यावरण रक्षक
पर्यावरण रक्षक ******* मानव पर्यावरण संरक्षण के नारे लगाता है। हर साल 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाता है। जल प्रदूषण, गाड़ियों का, फैक्ट्रियों का धुआँ कुछ कम करें। घटते वन्य जीवन और जैवीय दुष्प्रभावों का भी कुछ मनन करें। जनसंख्या विश्व की अगर इसी तरह बढ़ेगी। विश्व वृद्धि से पर्यावरण की गति .....क्या घटेगी। मानव बस नाटकीय सोपान पर चिल्लाता है। पर्यावरण का गला घोट जीव-जंतुओं को खाता है। अधिनियम बनाता है। प्रदूषण के नाम पर पर्यावरण सरंक्षण को भक्षक बन खाता है। चिलचिलाती जून की गर्मी में, जब पहले से लगे हुए पौधे- पेड़ भी, मुरझा -मुरझा कर मार रहे होते हैं । धरती को खोद -खोद कर 5 जून को पौधे लगता है । जो प्रकृति के लिए सही समय ही नहीं । बस दिन मनाने के लिए पर्यावरण का ढोंग रचाता है। स्वरचित रचना प्रीति शर्मा 'असीम' हिमाचल प्रदेश
