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Vivek Mishra

Classics

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Vivek Mishra

Classics

अब मैं तुम्हें याद नहीं करता

अब मैं तुम्हें याद नहीं करता

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अब मैं तुम्हें याद नहीं करता...
न उन राहों को...
जहाँ तेरे कदमों की आहट थी।

मैने जितने भी ख़्वाब देखे थे,
जिनमें तुम सबसे हसीं थी —
अब उन्हें भी... याद नहीं करता।

वो ख्वाब,
जो आधे खुले... आधे टूटे,
और आसमां तक पहुँचने से पहले ही... गिर पड़े,
उन्हें अब मैं गिनता नहीं...
जिन ख्वाबों को पंख न लगे हों,
उन्हें क्यों याद करना...

अब वो सारी चाहतें
मैं किसी और से पूरी कर रहा हूँ...
नज़रों में अब एक नया सवेरा उतर आया है।

जो बात तुमसे कभी न कह सका,
अब तो खुद से भी नहीं वो कहता 
अब मैं सच में तुम्हें याद नहीं करता।

अब मोहब्बत को इबादत नहीं कहता,
बस... एक ख़ूबसूरत गुज़र गया मौसम मानता हूँ।
जो चला गया —
उसे मौसम की तरह ही जाने दिया।
जो बचा,
उसे अब मैं ज़िन्दगी कहता हूँ।

कभी तेरी याद जब दिल के दरवाज़े पर दस्तक देती है,
तो मैं... मुस्कुरा देता हूँ —
जैसे कोई पुराना गीत...
दूर से सुनाई दे।

पर अब दिल उसे... गुनगुनाता नहीं।

अब तन्हाई भी परायी नहीं लगती,
उससे बातें करना आ गया है।
मैंने अपने भीतर... एक सुकून उगा लिया है,
जो किसी नाम से नहीं जुड़ता।

अब मैं तुम्हें याद नहीं करता...
क्योंकि अब मुझे...
ख़ुद को याद आ गया हूँ।


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