ज़िंदगी, वादा है तुमसे
ज़िंदगी, वादा है तुमसे
ज़िंदगी,
वादा है तुमसे —
तुम्हारे सारे सफ़े भर कर जाऊँगा,
हर एक सफ़े पर
अपनी
कुछ कहानियाँ कह जाऊँगा।
ज़िंदगी,
तुम कोई रास्ता नहीं — एक आईना हो,
जो हर रोज़ मुझे परखता है,
कभी ख़ामोशी से,
कभी तूफ़ानों की आवाज़ में।
तुमने कितनी ही बार
मेरे पैरों के नीचे ज़मीन खींची है,
और मैं हर बार
हवा में लटककर भी खड़ा रह गया हूँ।
तुम हर दफ़ा नया इम्तिहान लिखती हो,
मैं हर बार अपना जवाब बदल देता हूँ,
ताकि तुम समझ सको —
मैं कोई सवाल नहीं
जिसे हल कर लिया जाए।
मैं वो अधूरा लफ़्ज़ हूँ
जो हर बार मुकम्मल होने से इंकार करता है,
ताकि सफ़र चलता रहे,
और तुम मुझे पढ़ती रहो।
ज़िंदगी,
तुम जीतने की आदत में हो शायद,
पर मैं हार मानने वालों में नहीं,
मैं वो खामोशी हूँ
जो सबसे आख़िरी में बोलती है।
जब तुम थक जाओगी
मुझे आज़माते-आज़माते,
तब मैं मुस्कुराकर कहूँगा —
"देखा… मैं अब भी यहीं हूँ।"
ज़िंदगी…
वादा है तुमसे,
तुम्हें बस गुज़ारूँगा नहीं,
तुम्हें हर लम्हे में
पूरी तरह जी जाऊँगा।
