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Vivek Mishra

Romance Tragedy Classics

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Vivek Mishra

Romance Tragedy Classics

जवाब

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जवाब जिनके नहीं — वो सवाल मिले मुझको,
 ज़िंदगी भर कैसे-कैसे ख़्वाब मिले मुझको।

उम्र भर वो कोई फ़ैसला भी कर न सके,
रक़ीब भी कैसे हल्के ख़याल मिले मुझको।

हर ख़्वाब के जवाब में तेरा चेहरा था सामने,
पर हक़ीक़त में बस ख़ाली सवाल मिले मुझको।

गुज़रे हुए लम्हे थे जैसे रेत के दाने,
हर याद में तेरे बिखरे ख़याल मिले मुझको।

तेरे जाने के बाद ये समझ आया मुझको,
कितने अधूरे यहाँ कमाल मिले मुझको।

इश्क़ में खोया था दिल, फिर भी न मिली राहत,
तेरे इश्क़ के बाद बस मलाल मिले मुझको।

कुछ लोग मिले राह में चेहरे पे उजाला लिए,
मगर अंदर से सब बेहाल मिले मुझको।

गुज़री है उम्र इसी तलब में आख़िर,
जवाब जिनके नहीं — वो सवाल मिले मुझको।


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