Click here for New Arrivals! Titles you should read this August.
Click here for New Arrivals! Titles you should read this August.

Ramashankar Roy

Romance


4  

Ramashankar Roy

Romance


आवाज ना दो

आवाज ना दो

1 min 243 1 min 243

प्रिय छोड़ जाना मेरे हिस्से की धूप

जिसमें देख सकूं तेरा वही रूप।


पता नहीं किसका साया साथ होगा

मगर तेरी यादों का तोहफा पास होगा। 


एकदम भा गया चुपके चुपके आना तेरा

गुजरते कदमों के संग गया सुकून मेरा।


चाहत की बेखुदी में विभोर

हर पल नाचे मेरा मन मोर। 


आवाज ना देना लौटते राह को

बहाना मिल जाएगा मेरी चाह को। 


नन्हे दामन में लेना तू समेट

केहरी का यह अंतिम भेंट।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Ramashankar Roy

Similar hindi poem from Romance