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Ramashankar Roy 'शंकर केहरी'

Abstract

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Ramashankar Roy 'शंकर केहरी'

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अधुरापन का सत्य

अधुरापन का सत्य

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!! अधुरापन का सत्य!!
 सत्य अधुरा होता है
अधुरापन स्वयंसिद्ध सत्य होता है
शब्दों मे शामिल आधा आखर
दर्शाता शब्दार्थ की सत्यता और अधुरापन
दर्शाता शब्दार्थ की तितीक्षा और प्रतिक्षा
पूर्ण होने की, एकात्म होने की
प्यार और प्यास
जन्म और मृत्यु
सत्य और शाश्वत
सत्व और तत्व
भक्ती और मुक्ति
स्वास का जीवन धडकन तक
शब्दसत्य की पुर्णता यात्रा
कृष्ण का केशव बन जाना है
रुद्र का शिव बन जाना है
शक्ति का भवानी बन जाना है
सरस्वती का शारदा बन जाना है
प्रेम का पराग बन जाना है
भार्या का माँ बन जाना है
धर्म का धारणा बन जाना है
मनुष्य का मानवीय बन जाना है
आस्था का आराधना बन जाना है
तृष्णा का तोष बन जाना है
जहाँ शब्दबोध का अधुरापन होगा
वहाँ ज्ञानबोध का कारक धारक होगा ।।
शंकर केहरी


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