STORYMIRROR

Ramashankar Roy 'शंकर केहरी'

Others

4  

Ramashankar Roy 'शंकर केहरी'

Others

मैं नहीं जानता

मैं नहीं जानता

1 min
15

इस अनोखी दुनिया मे

जो भी है जैसा भी है

है आधी हकीकत आधा फसाना

कुछ जानते नहीं , कुछ मानते नहीं

दोनों अड़े हैं , खडे हैं

अज्ञानता के एक ही धरातल पर

खोजे नही मिलते कहनेवाले

" मैं नहीं जानता "

यह जानना कि नहीं जानता 

जान जाने की, जान पाने की

पहली और आखिरी शर्त है

मेरा घर ही शहर का आखिरी घर नही

जिसमे एक कमरा कम है

 छुपाकर रखने के लिए

अपने भाव अभाव और स्वभाव को

पहले वक्त चुराकर मिलते थे

अब वक्त निकालने की फुरसत नहीं

कठिन होता है सुनना

मधुर जीवन संगीत

अंतर्विरोधी तटों की

टकराहट मे कोलाहल मे 

उलझा रहता तीन सवालों मे

सही समय कौन ?

सही काम कौन ?

सही व्यक्ति कौन ?

कल ,आज और कल के लिए

अपने और आप के लिए

मैं नहीं जानता !!

फिर भी

जिज्ञासा बचाकर रखी है ।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन