STORYMIRROR

aazam nayyar

Fantasy Children

3  

aazam nayyar

Fantasy Children

आटा

आटा

1 min
205

गांव देखो लग रहा उजड़ा हुआ 

शायद लगता है यहाँ झगड़ा हुआ 


सोचता हूँ मैं कैसे लूँ पैसे नहीं 

ख़त्म घर में आज तो आटा हुआ


हंसता था जो दूसरों को प्यार से 

कल देखा ख़ामोश वो बैठा हुआ


चटनी रोटी से देख गुजरा होगा 

दाल चावल कब यार सस्ता हुआ


दाल सब्जी अब बनेगी ये कैसे 

तेल सरसों का देखो महंगा हुआ


इसलिए बैठा नहीं घर मेरे वो 

मेरे घर का था छप्पर टूटा हुआ 


भूल गये अपने अपनों के प्यार को 

आज़म रिश्ते से बड़ा पैसा हुआ 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy