STORYMIRROR

Divyanshi Triguna

Abstract Romance Fantasy

4  

Divyanshi Triguna

Abstract Romance Fantasy

तुलसी में मोहन रहते

तुलसी में मोहन रहते

1 min
245

मन बहते कृष्ण मुरारी, 

उनका ये मन मधुबन में हैं, उनकी हैं राधा प्यारी

जीवन समर्पण अर्पण, छोड़ के अब दुनिया दारी


सुबह का सूरज तुझमें, शाम भी ढले श्याम में

जीवन आरंभ तुम्हीं हो, जीवन का अंत भी तुझमें


सुबह में जल अर्पण कर, तुलसी में ध्यान करें मन

प्रेम ही रहता हैं हर पल, श्रीमन के नाम हुआ मन


आता एहसास के जैसे, तन रहता श्वास जैसे

तुलसी में मोहन रहते, वो यहां वास करें जैसे.......


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract