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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy Inspirational

"आतंकवाद पर वार-एकता शक्ति समझ

"आतंकवाद पर वार-एकता शक्ति समझ

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आतंकियों ने फिर से की कायराना,हरकत

राजौरी में फिर से किया,हमला बहाया,रक्त


पहले रविवार को चार को किया था,मृतक

सोमवार,बच्चो को किया,खून से लथपथ


आतंकियों में न है,कोई दया,रहम,मोहब्बत

ये लोग है,इंसानियत की सबसे बड़ी मुसीबत


इनका न कोई धर्म,यह है,बुराई जबर्दस्त

इस बुराई को,खत्म करो,लो सब शपथ


अन्यथा बदसूरत हो जायेगी,यह जन्नत

खुदा ने तो दिया था,पैगाम ए मोहब्बत


खत्म करो जड़ से,जो,अच्छाई की ग़ुरबत

कई वर्षो से शहीदों ने जो चुकाई है,कीमत


उस बलिदान की ही देन है,कश्मीर की छत

आओ इस आतंकवाद को मुंहतोड़ दे,उत्तर


एकता और भाईचारे से भारत बनाये,उन्नत

एकता के बल,से ही होगा,आतंकवाद,पस्त


तभी खिलेंगे,यह गुलाब ए अमन हर तरफ

जब देश हेतु लेंगे,एकता का अटूट संकल्प


राम की जब डूबेगी,नाव,रहीम थामेगा,पतवार

राम करेगा,बचाव,रहीम पर करेगा,कोई वार


तब मिलेगी,आतंकवाद को करारी शिकस्त

जब आएगी,हमे हमारी एकता शक्ति समझ



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