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डॉ मधु त्रिवेदी

Romance


4.5  

डॉ मधु त्रिवेदी

Romance


आपके बिना

आपके बिना

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आपके बिन रह अधूरे जाएंगे

जिन्दगी में हो अँधेरे जाएंगे


दूरियाँ अपनी मिटेगी आज तो 

आपके हो हम दीवाने जाएंगे


दौड़ती थी जिन्दगी रफ्तार से

काम के बिन तो निवाले जाएंगे


दिल हमारे जल रहे अंगार है

पास आये तो पिघलते जाएंगे


बस निभाते ही रहे इस प्यार को

दूर जाने पर उजड़ते जाएंगे


आप आकर रोज हमसे मिले जब

 साथ पाकर हो तुम्हारे जाएंगे


 इस मुहब्बत पर लुटा दे सर्वस्व तू 

जाम मय वो पिलाते जाएंगे


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