Nilofar Farooqui Tauseef
Tragedy
एक आँसू बोल पड़ा
तेरे दर्द से काग़ज़ की स्याही बिखर गई
जिस्म के रोंगटे खड़े हुए और वो सिहर गई।
जल ही अमृत है
कफ़न चोर
हिंदी दिवस
कुँवारी माँ
रेड लाइट एरिय...
पापा मेरी दुन...
पानी का बुलबु...
ढिबरी
सुहागन हूँ मै...
टूट गयी शाख़
नाहक समझकर अपनों ने, नाचीज बना दिया मुझको। नाहक समझकर अपनों ने, नाचीज बना दिया मुझको।
वतन की अस्मिता की रक्षा की जा रही भारतीयों के हवाले। वतन की अस्मिता की रक्षा की जा रही भारतीयों के हवाले।
एक ऐसा साल जो हो गया बदनाम, कुचल गया कितने ही सपने और अपने। एक ऐसा साल जो हो गया बदनाम, कुचल गया कितने ही सपने और अपने।
समझना हो जिसे ना कुछ कि समझाने कहाँ जायें। समझना हो जिसे ना कुछ कि समझाने कहाँ जायें।
इस जग में हर छोर दो पहलू वो नहीं तो ये होना ही हैI इस जग में हर छोर दो पहलू वो नहीं तो ये होना ही हैI
इस वायरस तले पिस रहा है पूरा संसार, इंसान का इंसान के प्रति घट रहा है प्यार, इस वायरस तले पिस रहा है पूरा संसार, इंसान का इंसान के प्रति घट रहा है प्यार,
पर ऐसा नहीं है कि बच्चा खुशी से ये सब कर रहा है. पर ऐसा नहीं है कि बच्चा खुशी से ये सब कर रहा है.
"मुरली" की मीठी तानें सुनाना, श्याम कब करेगा तू सपना पूरा। "मुरली" की मीठी तानें सुनाना, श्याम कब करेगा तू सपना पूरा।
जनता को मोहने के लिए अनेक जादूगर रहे हैं घूम। जनता को मोहने के लिए अनेक जादूगर रहे हैं घूम।
किसी और के घर को रौशन करने तुम मेरा ही प्रिय घर तिमिर कर चली. किसी और के घर को रौशन करने तुम मेरा ही प्रिय घर तिमिर कर चली.
जब मन में किसी के लिये कोई ज़ज्बात निकलता है... जब मन में किसी के लिये कोई ज़ज्बात निकलता है...
अब दोष दूं औरों को मैं क्यों, बदनाम किया मुझे अपनों ने अब दोष दूं औरों को मैं क्यों, बदनाम किया मुझे अपनों ने
तुझसे बिछड़ के अब जी रहा हूं मर-मर कर। तुझसे बिछड़ के अब जी रहा हूं मर-मर कर।
एहसास शायद होगा तुम्हें क्या होते है लम्हे कयामत के एहसास शायद होगा तुम्हें क्या होते है लम्हे कयामत के
इस अनजान शहर में मुझे लोग तो बहुत हैं , मगर मेरे अपने कोई नहीं मिले। इस अनजान शहर में मुझे लोग तो बहुत हैं , मगर मेरे अपने कोई नहीं मिले।
एक दिन एहसास होगा, जब दिल से प्यार होगा एक दिन एहसास होगा, जब दिल से प्यार होगा
भारत मां का सीना छलनी कर खुद को देश भक्त कहते हैं। भारत मां का सीना छलनी कर खुद को देश भक्त कहते हैं।
टूट चुका है परिवार हरेक का सभी अलग थलग पड़े हैं। टूट चुका है परिवार हरेक का सभी अलग थलग पड़े हैं।
मैं वही हूं जो फिरता हूं मारा - मारा दिन रात सुबह शाम मैं वही हूं जो फिरता हूं मारा - मारा दिन रात सुबह शाम
रात अंधेरी जम रही है, किसी को पुछ सकता नहीं। रात अंधेरी जम रही है, किसी को पुछ सकता नहीं।