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sadhna Parmar

Tragedy Inspirational

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sadhna Parmar

Tragedy Inspirational

निगाहों का नज़राना

निगाहों का नज़राना

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नज़राना तो नज़राना होता है,

फर्क तो देखने वालों की निगाहों का होता है,

किसी को आँखों के आँसू नहीं दिखते,

लेकिन होंठों की हँसी जरूर दिखाई देती है,

किसी को दुःख नज़र नहीं आते,

लेकिन ख़ुशियाँ दिख जाती है,

खुद को तकलीफ़ हो तो आँसू बरसते है,

दूसरों को तकलीफ़ हो तो हँसी बरसती है,

खुद कुछ गलत करो तो सब चलता है,

कोई दूसरा गलत करे तो गुनाह बन जाता है,

खुद किसी से प्यार करे तो वो प्यार है,

दूसरा करे तो प्यार करना पाप है,

हाथों पे लगे घाव को सब देख लेते है,

दिल पे लगे घाव कोई नहीं समझ पाता है।

वक़्त वक़्त की बात है इस दुनियादारी में,

इंसान को जो चाहिए होता है उसे वहीं दिखाई देता है।


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