STORYMIRROR

Zeetu Bagarty

Tragedy

4  

Zeetu Bagarty

Tragedy

भीड़ लगी है

भीड़ लगी है

1 min
185

भीड़ लगी है यहां पर

अपने आप को अच्छा दिखाने की,

अपने आप को सच्चा बताने की,

अपना फल पक्का और 

दूसरों का कच्चा बताने की 

भीड़ लगी है यहां पर..

भीड़ लगी है यहां पर..

अपनी असलियत छुपाने की, 

अपना झूठ छुपाने की,

अपने को ऊंचा और

दूसरों को नीचा दिखाने की

भीड़ लगी है यहां पर...

भीड़ लगी है यहां पर

सबसे आगे निकल जाने की, 

सबको पीछे छोड़ जाने की, 

इस्तेमाल कर दूसरों का 

अपनी मंजिल को पाने की 

भीड़ लगी है यहां पर।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy