STORYMIRROR

मोहनजीत कुकरेजा (eMKay)

Romance

3  

मोहनजीत कुकरेजा (eMKay)

Romance

आमंत्रण

आमंत्रण

1 min
291

मेघाछन्न व्योम से, प्रिये

बरस रहा हो नीर,

हृदय की भीगी मिट्टी

महक रही हो सौंधी सी,

प्रेम की नव-कोंपलें

फूटने को हों तत्पर। 

मन के समस्त भावों का

मुख पे शोभायमान हो

इन्द्रधनुष मनोहर एक,

स्नेहिल सा संगीत कोई

स्वर-लहरियां मधुर बन

प्रतिध्वनित लगे होने। 

भावनाओं के अतिरेक से

चाहत भी हो उठी अधीर,

होता हो सब अनायास ही

ऐसे में तुम चली आना…



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance