STORYMIRROR

AMAN SINHA

Romance Tragedy Fantasy

3  

AMAN SINHA

Romance Tragedy Fantasy

आखिर क्यूं ?

आखिर क्यूं ?

1 min
196

हमें पाकर भी उन्हें क्या मिलेगा

पल भर की खुशी फिर रोज़ ही जलेगा

चाहे कहे या ना कहे वो होठों से मगर

ये सिलसिला तो अब रोज़ ही चलेगा

 

नहीं पता उसने ऐसा क्यूं किया

हमें जानकर भी अपना दिल क्यूं दिया

ज़ख़्म उसे सुकून देते हैं शायद

तभी उसने दर्द से अपना दामन भर लिया

 

मेरी लाख लानतों के बाद भी

क्यूं वो हर रोज़ चला आता है

लगता है उसे मेरे शौक पसंद है

तभी हर रोज़ मज़ा देने आता है

 

कोई इतना ग़म कैसे ढो सकता है

बंज़र दिल में प्यार के बीज बो सकता है

बस एक हमारे सुकून की खातिर

हर बार वो हमसे रुसवा हो सकता है


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance