STORYMIRROR

Namrata Rastogi

Romance

4  

Namrata Rastogi

Romance

इश्क़

इश्क़

1 min
231

कुछ भी कहो ये इश्क़

बड़ा ही खूबसूरत है

हर उम्र में इंसान को

इसकी जरूरत है

इश्क़ इंसान को जीने का

शऊर सिखाता है


जो इश्क़ में है ना जाने क्यों

वो शख्स हरदम मुस्कुराता है

बियाबां में भी लगता है

खिले हो फूल हर तरफ जैसे

समंदर को देखकर जैसे

किनारा झूम जाता है


इश्क़ में तन्हाइयां भी

महफ़िल सी लगती हैं

खुली आँखों से आशिक़

सात अम्बर घूम आता है


अलग है दुनिया इसकी तो

अलग रिवायतें भी है

थोड़ी सी नोकझोक है

थोड़ी शिकायते भी है

ना जाने कब कोई चेहरा

दिल पे काबिज हो जाता है


कुछ भी कहो ये इश्क़

बड़ा ही खूबसूरत है

हर उम्र में इंसान को

इसकी जरूरत है

इश्क़ इस को जीने का

शऊर सिखाता है!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Namrata Rastogi

इश्क़

इश्क़

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Romance