आज प्रकृति आजाद है
आज प्रकृति आजाद है
ओस की नन्ही बूंदों का पत्तों पर गिरना अच्छा है
धरती पर इस तूफान के धूल का उड़ना अच्छा है
मानव ने दी बहुत यातना प्रकृति के कोमलता को
उलटी दिशा में अब तो हर नदियों का मुड़ना अच्छा है
यही इसका अंदाज है
आज प्रकृति आजाद है
थोड़ी सी तो लाज बचा लो धरती के प्रकोप से
तीव्र तेज में जल ना जाओ, तुम इसके पीले धूप से
घोर घटा ये सावन की और कंपन हृदय की तेज हुई
बचना मुश्किल हो ना जाये मौसम के रुद्र रूप से
विनाश का ही आगाज है
आज प्रकृति आजाद है
कितने मीठे मीठे लगते पंछी चिड़ियों के ये कलरव
आओ हरियाली बनायें धरती को हम सब मिलकर
धरती पर उतरे एक दिन जब कोई परी मोहित होकर
देखे इतनी सुन्दर धरती गाँव शहर जब हर्षित होकर
धरा की यही आवाज है
आज प्रकृति आजाद है
